फ़िक्स्ड डिपॉज़िट (FD) क्या है?
फ़िक्स्ड डिपॉज़िट में आप एकमुश्त रकम बैंक, स्मॉल फ़ाइनेंस बैंक या पोस्ट ऑफ़िस में तय अवधि के लिए तय ब्याज दर पर जमा करते हैं। FD खोलते समय ही दर तय हो जाती है, इसलिए मैच्योरिटी रकम पहले से पता रहती है। यह कैलकुलेटर क्यूम्युलेटिव FD मानकर चलता है, जिसमें ब्याज जमा रकम में जुड़ता रहता है और मैच्योरिटी पर एक साथ मिलता है।
FD पर ब्याज की गणना कैसे होती है?
बैंक चक्रवृद्धि ब्याज (compound interest) लगाते हैं:
A = P × (1 + r ÷ n)n × t
- A = मैच्योरिटी रकम
- P = जमा रकम
- r = सालाना ब्याज दर ÷ 100
- n = साल में कितनी बार ब्याज जुड़ता है (तिमाही के लिए 4)
- t = अवधि (साल में)
भारत के ज़्यादातर बैंक हर तिमाही ब्याज जोड़ते हैं। बहुत छोटी FD (आमतौर पर 6 महीने से कम) पर कई बैंक साधारण ब्याज देते हैं, इसलिए उनकी रकम इस अनुमान से थोड़ी कम हो सकती है।
उदाहरण: ₹1 लाख और ₹5 लाख की FD
7% सालाना दर, तिमाही चक्रवृद्धि पर:
| जमा रकम | अवधि | मैच्योरिटी रकम | मिलने वाला ब्याज |
|---|---|---|---|
| ₹1 लाख | 1 साल | ₹1,07,186 | ₹7,186 |
| ₹1 लाख | 3 साल | ₹1,23,144 | ₹23,144 |
| ₹1 लाख | 5 साल | ₹1,41,478 | ₹41,478 |
| ₹5 लाख | 5 साल | ₹7,07,389 | ₹2,07,389 |
क्या ब्याज जुड़ने का तरीका मायने रखता है?
₹1 लाख, 7% दर, 5 साल के लिए:
| ब्याज जुड़ने का तरीका | मैच्योरिटी रकम |
|---|---|
| मासिक | ₹1,41,763 |
| तिमाही | ₹1,41,478 |
| छमाही | ₹1,41,060 |
| सालाना | ₹1,40,255 |
जितनी बार ब्याज जुड़ता है, उतना थोड़ा ज़्यादा मिलता है, लेकिन ब्याज दर और अवधि का असर कहीं ज़्यादा होता है। परिणाम में दिखने वाला "प्रभावी सालाना रिटर्न" चक्रवृद्धि के बाद का असली सालाना रिटर्न बताता है।
FD के ब्याज पर टैक्स
FD का ब्याज आपकी आय में जुड़ता है और आपके इनकम टैक्स स्लैब के अनुसार टैक्स लगता है। अगर एक वित्त वर्ष में एक बैंक से मिलने वाला ब्याज तय सीमा (मौजूदा नियमों के अनुसार ₹50,000, वरिष्ठ नागरिकों के लिए ₹1 लाख) से ज़्यादा हो, तो बैंक TDS काटता है। अगर आपकी कुल आय टैक्स-योग्य सीमा से कम है, तो TDS से बचने के लिए बैंक में फ़ॉर्म 121 जमा कर सकते हैं (अप्रैल 2026 से इसने फ़ॉर्म 15G और 15H की जगह ली है)।
टिप्स
- दरों की तुलना करें। वरिष्ठ नागरिकों को आमतौर पर 0.25–0.50% ज़्यादा ब्याज मिलता है, और स्मॉल फ़ाइनेंस बैंक अक्सर बड़े बैंकों से ज़्यादा दर देते हैं।
- बड़ी रकम को बाँटें। अलग-अलग मैच्योरिटी वाली कई छोटी FD ("FD लैडर") से ज़रूरत पड़ने पर पूरी FD तोड़े बिना पैसा मिल जाता है।
- सुरक्षा सीमा जानें। हर बैंक में जमा रकम DICGC द्वारा प्रति जमाकर्ता ₹5 लाख (ब्याज सहित) तक बीमित है।
- FD समय से पहले न तोड़ें। समय से पहले निकासी पर आमतौर पर ब्याज दर में 0.5–1% की कटौती होती है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्यूम्युलेटिव और नॉन-क्यूम्युलेटिव FD में क्या फ़र्क है?
क्यूम्युलेटिव FD में ब्याज जमा रकम में जुड़ता रहता है और सब कुछ मैच्योरिटी पर मिलता है, इसलिए ब्याज पर भी ब्याज मिलता है। नॉन-क्यूम्युलेटिव FD में ब्याज हर महीने या तिमाही आपको मिलता है, इसलिए मैच्योरिटी पर सिर्फ़ मूल रकम वापस मिलती है। यह कैलकुलेटर क्यूम्युलेटिव रकम दिखाता है।
क्या FD के ब्याज पर टैक्स लगता है?
हाँ। FD के ब्याज पर हर साल आपके स्लैब के अनुसार टैक्स लगता है, भले ही क्यूम्युलेटिव FD में ब्याज मैच्योरिटी पर ही मिले। बैंक TDS भी काट सकता है।
FD में मेरा पैसा कितना सुरक्षित है?
RBI द्वारा नियंत्रित बैंकों में जमा रकम DICGC द्वारा प्रति जमाकर्ता प्रति बैंक ₹5 लाख तक बीमित है, जिसमें मूलधन और ब्याज दोनों शामिल हैं।
क्या FD मैच्योरिटी से पहले बंद की जा सकती है?
ज़्यादातर FD पहले बंद की जा सकती हैं, लेकिन बैंक कम ब्याज दर देता है और 0.5–1% की पेनल्टी लगती है। टैक्स-सेवर FD में 5 साल का लॉक-इन होता है और उसे पहले बंद नहीं किया जा सकता।
क्या मेरी डाली हुई जानकारी कहीं सेव होती है?
नहीं। पूरी गणना आपके ब्राउज़र में ही होती है। आपकी कोई भी जानकारी हमारे सर्वर पर नहीं भेजी जाती और न ही सेव होती है।