EMI क्या है?
EMI यानी Equated Monthly Instalment (समान मासिक किस्त) — वह तय रकम जो आप लोन पूरा चुकने तक हर महीने बैंक को देते हैं। हर EMI के दो हिस्से होते हैं: बकाया रकम पर ब्याज और मूलधन (principal) का एक हिस्सा। शुरुआती सालों में EMI का बड़ा हिस्सा ब्याज में जाता है, जबकि बाद के सालों में ज़्यादातर हिस्सा मूलधन घटाता है। ऊपर "साल-दर-साल शेड्यूल" खोलकर आप अपने लोन के लिए यह देख सकते हैं।
EMI की गणना कैसे होती है?
बैंक रिड्यूसिंग बैलेंस फ़ॉर्मूला इस्तेमाल करते हैं:
EMI = P × r × (1 + r)n ÷ ((1 + r)n − 1)
- P = लोन की रकम
- r = मासिक ब्याज दर (सालाना दर ÷ 12 ÷ 100)
- n = कुल मासिक किस्तों की संख्या
उदाहरण के लिए, 9% सालाना दर पर r = 9 ÷ 12 ÷ 100 = 0.0075।
उदाहरण: ₹5 लाख और ₹10 लाख के लोन पर EMI
| लोन | ब्याज दर | अवधि | मासिक EMI | कुल ब्याज | कुल भुगतान |
|---|---|---|---|---|---|
| ₹5 लाख | 9% | 5 साल | ₹10,379 | ₹1,22,751 | ₹6,22,751 |
| ₹10 लाख | 9% | 5 साल | ₹20,758 | ₹2,45,501 | ₹12,45,501 |
| ₹10 लाख | 9% | 10 साल | ₹12,668 | ₹5,20,109 | ₹15,20,109 |
₹10 लाख के लोन की अवधि 5 से 10 साल करने पर EMI लगभग ₹8,000 कम हो जाती है, लेकिन कुल ब्याज दोगुने से भी ज़्यादा हो जाता है।
ब्याज दर बदलने से EMI पर असर
₹10 लाख का लोन, 10 साल के लिए:
| ब्याज दर | मासिक EMI | कुल ब्याज |
|---|---|---|
| 8% | ₹12,133 | ₹4,55,931 |
| 9% | ₹12,668 | ₹5,20,109 |
| 10% | ₹13,215 | ₹5,85,809 |
| 11% | ₹13,775 | ₹6,53,000 |
सिर्फ़ 1% के फ़र्क से इस लोन पर कुल ब्याज लगभग ₹65,000 बदल जाता है। इसलिए लोन लेने से पहले दो-तीन बैंकों के ऑफ़र की तुलना ज़रूर करें।
कम ब्याज चुकाने के टिप्स
- जब हो सके, प्रीपेमेंट करें। अतिरिक्त भुगतान सीधे मूलधन घटाता है, इसलिए आगे हर महीने का ब्याज कम हो जाता है। RBI के नियमों के अनुसार व्यक्तिगत (गैर-व्यावसायिक) फ़्लोटिंग रेट लोन पर बैंक प्रीपेमेंट पेनल्टी नहीं ले सकते; फ़िक्स्ड रेट लोन पर शुल्क लग सकता है, इसलिए अपना लोन एग्रीमेंट देखें।
- सबसे कम अवधि चुनें जिसकी EMI आप आराम से भर सकें। लंबे होम लोन पर थोड़ी ज़्यादा EMI से लाखों रुपये का ब्याज बच सकता है।
- कुल EMI अपने बजट में रखें। बैंक आमतौर पर चाहते हैं कि आपकी कुल EMI मासिक आय के 40–50% के भीतर रहे।
- अतिरिक्त खर्च भी जोड़ें। प्रोसेसिंग फ़ीस और लोन बीमा से लोन की असली लागत बढ़ जाती है।
यह कैलकुलेटर स्टैंडर्ड रिड्यूसिंग बैलेंस पद्धति का इस्तेमाल करता है। राउंडिंग या पहले अधूरे महीने के ब्याज की वजह से बैंक की EMI में कुछ रुपये का फ़र्क हो सकता है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या यह कैलकुलेटर होम, कार और पर्सनल लोन के लिए काम करता है?
हाँ। होम, कार, टू-व्हीलर, पर्सनल और एजुकेशन लोन सभी में एक ही रिड्यूसिंग बैलेंस फ़ॉर्मूला लगता है। बैंक द्वारा बताई गई रकम, ब्याज दर और अवधि डालें।
शुरुआती EMI का ज़्यादातर हिस्सा ब्याज में क्यों जाता है?
ब्याज बकाया रकम पर लगता है, जो लोन की शुरुआत में सबसे ज़्यादा होती है। जैसे-जैसे मूलधन चुकता होता है, हर EMI में ब्याज का हिस्सा घटता है और मूलधन का हिस्सा बढ़ता है।
क्या लंबी अवधि बेहतर है?
लंबी अवधि में EMI कम होती है, लेकिन कुल ब्याज बहुत ज़्यादा हो जाता है। ऐसी सबसे कम अवधि चुनें जिसकी EMI आपके मासिक बजट में आराम से फ़िट हो।
ब्याज दर बदलने पर क्या मेरी EMI बदलेगी?
फ़्लोटिंग रेट लोन पर दर बदलने पर बैंक EMI या बची हुई अवधि में से किसी एक को बदलता है। अपने बैंक से पूछें कि आपके लोन पर कौन-सा विकल्प लागू है; आमतौर पर आप अपनी पसंद का विकल्प माँग सकते हैं।
क्या मेरी डाली हुई जानकारी कहीं सेव होती है?
नहीं। पूरी गणना आपके ब्राउज़र में ही होती है। आपकी कोई भी जानकारी हमारे सर्वर पर नहीं भेजी जाती और न ही सेव होती है।